मणिपुर हिंसा – क्यों जल रहा है मणिपुर?

* 3 मई को आदिवासी प्रदर्शन में मणिपुर हिंसा शुरू हुई। फलस्वरूप आठ जिलों में कर्फ्यू लगा दिया गया। 55 टुकड़ियां सेना और असम राइफल्स की तैनात की गई। 9000 लोगों को बचाव कैम्पों में स्थानांतरित किया गया था।

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* मणिपुर हिंसा में शामिल  दंगाइयों को सरकार ने गोली मारने का आदेश दिया है। धारा 144 हिंसाग्रस्त क्षेत्रों में लागू है। राज्य में इंटरनेट सेवा अगले पांच दिनों के लिए स्थगित कर दी गई है।

* गृहमंत्री अमित शाह ने मुख्यमंत्री N वीरेन सिंह से फोन पर बातचीत करके स्थिति की जानकारी ली। वीरेन सिंह ने शांति बनाए रखने की अपील की एक वीडियो मैसेज जारी कर।

* साथ ही, केंद्र ने RAF की टीमों को मणिपुर राज्य के हिंसा प्रभावित क्षेत्रों में तैनाती के लिए भेजा है।

मणिपुर हिंसा कब शुरू हुई ?

* चुराचंदपुर जिले से मौजूदा संघर्ष शुरू हुआ। ये राजधानी इम्फाल से लगभग 63 किलोमीटर दक्षिण में है। इस जिले में कुकी आदिवासियों की आबादी अधिक है। 28 अप्रैल को, द इंडिजेनस ट्राइबल लीडर्स फोरम ने चुराचंदपुर में  गवर्नमेंट लैंड सर्वे  के खिलाफ आठ घंटे का बंद घोषित किया। देखते ही देखते यह बंद हिंसक हो गया। उसी रात तुड़बोंग क्षेत्र में उपद्रवियों  ने वन विभाग के कार्यालय को जलाया। 27 और 28 अप्रैल को हुई हिंसा में मुख्य रूप से पुलिस और कुकी आदिवासियों का संघर्ष था।

* 3May, इसके पांचवें दिन, ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ मणिपुर ने ‘आदिवासी एकता मार्च’ निकाला। ये मैतेई समुदाय को ST दर्जा देने के खिलाफ था। यहीं से हालात काफी खराब हो गए। मैतेई समुदाय ने आदिवासियों के इस प्रदर्शन का विरोध किया। देखते ही देखते, पूरा मणिपुर हिंसा में जलने लगा।

मणिपुर हिंसा की तीन वजहें

1- मैतेई समुदाय के ST दर्जे का विरोध :

* पिछले कई सालों से मैतेई ट्राइब यूनियन ने समुदाय को आदिवासी दर्जा देने की मांग की है। इस पर सुनवाई करते हुए मणिपुर हाईकोर्ट ने 19 अप्रैल को राज्य सरकार से 10 वर्ष पुरानी केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सिफारिश देने को कहा। इस सिफारिश में मैतेई समुदाय को जनजाति का दर्जा देने की बात की गई है ।

* मैतेई समुदाय को आदिवासी दर्जा देने का निर्णय कोर्ट ने दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अब हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दी है। इस केस को चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़, जस्टिस पी एस नरसिम्हा और जस्टिस जेबी पारदीवाला सुन रहे है।

2- सरकार की अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई :

* आरक्षण विवाद के बीच मणिपुर सरकार की अवैध अतिक्रमण के खिलाफ की गई कार्रवाई ने चिंगारी का काम किया । मणिपुर सरकार का कहना है कि आदिवासी लोग संरक्षित जंगलों और वन अभयारण्यों में अफीम की खेती कर रहे हैं। ये अतिक्रमण हटाने के लिए सरकार Manipur Forest Rule 2021 के तहत वन भूमि पर अतिक्रमण हटाने का अभियान चला रही है।

* दूसरे तरफ आदिवासियों का दावा है कि यह उनके पूर्वजों की जमीन है। वे सालों से वहां रहते आ रहे हैं न कि हमने अतिक्रमण किया। आदिवासी लोगों ने सरकार की इस कार्रवाई को अपनी  पूर्वजों की जमीन से हटाने की तरह रखा जिससे आक्रोश फैल गया।

3- कुकी विद्रोही संगठनों ने सरकार से हुए समझौते को तोड़ दिया :

* केंद्र सरकार के साथ 2008 में हुए एग्रीमेंट को, कुकी विद्रोही संगठनों ने भी हिंसा के बीच तोड़ दिया। 2005 तक, कुकी जनजाति के कई समूह सैन्य विद्रोह में शामिल रहे हैं। 2008 में, मनमोहन सिंह सरकार ने लगभग सभी कुकी विद्रोही संगठनों से सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशन (SOS) एग्रीमेंट किया, जिसका उद्देश्य था उनके खिलाफ सैन्य कार्रवाई रोकना।

* इसका उद्देश्य राजनीतिक बातचीत को प्रोत्साहित करना था। तब समझौते की अवधि बार-बार बढ़ाई जाती थी, लेकिन मणिपुर सरकार ने 10 मार्च को कुकी समुदाय के दो संगठनों के लिए इसे रद्द कर दिया। जोमी रेबुलुशनरी आर्मी और कुकी नेशनल आर्मी दो संगठन हैं इनके पास हथियार हैं। सेना और पुलिस पर हमला करने वाले हथियारबंद इन संगठनों के सदस्यों ने भी मणिपुर की हिंसा में भाग लिया।

* पुलिस ने बताया कि मार्च में हजारों आदिवासी लोग शामिल हुए। उसी समय आदिवासी और गैर-आदिवासी लोगों के बीच हिंसात्मक तनाव बढ़ गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने भी आंसू गैस के गोले दागे, लेकिन हिंसा नहीं रुकी। इसके बाद Reinforcement Force के लिए  असम राइफल्स और सेना को बुलाया गया।

मणिपुर हिंसा क्या है विवाद ?

इसे समझने के लिए हमें मणिपुर की भौगोलिक स्थिति पता होना चाहिए।

* दरअसल, मणिपुर की राजधानी इम्फाल बिल्कुल बीच में है। ये पूरे प्रदेश का 10% हिस्सा घाटी है, जिसमें प्रदेश की 57% आबादी रहती है इसमें 53% हिस्सा अकेले मैतेई समुदाय की आबादी का है जो एक गैर-आदिवासी हिंदू समुदाय है जो मैतेई भाषा बोलते हैं। ये पिछले 10 साल से अपने समुदाय को ST स्टेटस दिए जाने की मांग कर रहे हैं। आंकड़ों के मुताबिक सूबे के कुल 60 MLA में से 40 MLA मैतेई वर्ग से हैं।

* बाकी चारों तरफ 90% हिस्से पहाड़ी इलाके हैं, जहां प्रदेश की 43% आबादी रहती है। इसमें मुख्यतः नागा और कुकी आदिवासी जनजाति हैं ये दोनों जनजातियां मुख्य रूप से ईसाई हैं।

* मणिपुर राज्य में 33 अनुसूचित जाति हैं :

ऐमोल, अनल, अंगामी, चिरु, चोथे, गंगटे, हमार, काबुई, काचा नागा, कोइराओ, कोइरेंग, कोम, लुमगांग, मिज़ो, लुशाई, मारम, मारिंग, माओ, मोनसांग, मोयोन, पाइते, राल्ते, सेमा, सिम्टे, सुहते, तांगखुल, थाडौ, वैफेई, ज़ो, पौमेई नागा, ताराओ, खारम वे अधिकतर मणिपुर के पहाड़ी क्षेत्रों में रहते हैं।

* इन तीनों के अलावा, यहां मुस्लिम लोग भी रहते हैं, और यहां गैर आदिवासी मयांग भी रहते हैं जो देश भर से आकर यहां बसे हैं।

* भारतीय संविधान के आर्टिकल 371C के तहत मणिपुर की पहाड़ी जनजातियों(ST) को मैतेई समुदाय से अलग दर्जा और सुविधाएं मिली हैं।

* मैतेई समुदाय का कहना है कि राज्य में म्यांमार और बांग्लादेश से अधिक घुसपैठ से इन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

* ‘भूमि पुनर्गठन अधिनियम’ की वजह से मैतेई लोग पहाड़ी क्षेत्रों में जमीन खरीदकर बस नहीं सकते। जनजातियों को पहाड़ी क्षेत्रों से घाटी में आकर बसने पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इससे दोनों समुदायों में द्वेष बढ़ गया है।

* मैतेई का दावा क्या है :

मैतेई लोगों का मानना है कि कुकी को सालों पहले उनके शासक ने म्यांमार से युद्ध लड़ने के लिए बुलाया था। तब से वे स्थायी निवासी बन गए। रोजगार के लिए इन लोगों ने जंगल काटे और अफीम की खेती करने लगे। इससे मणिपुर ड्रग तस्करी का केंद्र बन गया है। यह सब खुले तौर पर हो रहा है। नागा लोगों से लड़ने के लिए उन्होंने एक Army ग्रुप बनाया इससे स्पष्ट है की देश में अशांति फ़ैलाने के लिए विदेशी तत्त्व इन्हे हथियार उपलब्ध करा रहे है। कुकी म्यांमार की सीमा पार कर मणिपुर के जंगलों में बस गए हैं, जिन्हें हटाने के लिए राज्य सरकार अभियान चला रही है।

* जनजातीय वर्ग की विरोध की वजह:

वहीं राज्य का जनजातीय वर्ग हाईकोर्ट के फैसले से असहमत है। जनजातीय वर्ग को डर है कि अगर मैतेई समुदाय को जनजातीय वर्ग में शामिल किया जाता है, तो वे उनकी जमीन और संसाधनों पर अधिकार कर लेंगे।

मणिपुर के प्रसिद्ध खिलाड़ियों में साइखोम मीराबाई चनु(भारोत्तोलन में गोल्ड मेडल-49KG) और मैरी कॉम(बॉक्सिंग) ने प्रधानमंत्री और ग्रहमंत्री से अपने राज्य को बाचने के लिए मदद मांगी है।

Manipuri का एक वीडियो वायरल हुआ 

जिसमें दो महिलाओं को भीड़ ने निर्वस्त्र करके सड़क पर घुमाया बाद में उनका रेप किया गया जो 4 May की घटना है। महिलाओं के साथ इस अभद्रता ने पूरे भारत को दहला दिया। मानसून सत्र के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा, ‘मेरा हृदय गुस्से से भरा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा, ‘जो वीडियो हमारे सामने आया है, उससे हम बहुत दुखी हैं, हम सरकार को कुछ दिनों का समय दे रहे है वरना हम खुद इस पर कार्यवाही करेंगे।

                       

FIR के अनुसार, महिला से बलात्कार

* वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया घटना 4 May (मैतेई और कुकी समुदायों के बीच झड़प के एक दिन बाद) को थौबल जिले में घटित हुई और 18 May को कांगपोकपी जिले में जीरो FIR दर्ज की गई थी।

* अज्ञात बदमाशों के खिलाफ अपहरण, सामूहिक बलात्कर और हत्या की धाराओं में FIR दर्ज हुई, हालांकि कोई गिरफ्तारी नहीं हुई थी। ढाई महीने बाद वीडियो वायरल हुआ तो 1 गिरफ्तारी की बात सामने आ रही है।

* मणिपुर पुलिस अधीक्षक मेघचंद्र सिंह ने 19 जुलाई की शाम प्रेस नोट में कहा कि राज्य पुलिस जल्द से जल्द दोषियों को गिरफ्तार करने के लिए हर मुमकिन प्रयास कर रही है।

* 4 May की दोपहर 3 बजे, कांगपोकपी जिले में बी. फीनोम गांव में 800 से 1000 लोग घुसे। उनके पास AK-47, SLR, इंसास और 303 राइफल्स जैसे आधुनिक हथियार थे, और उन्होंने  घरों में तोड़फोड़ की, इलेक्ट्रॉनिक, बर्तन, कपड़े और नकदी लूटने के बाद घरों में आग लगा दी। संदेह है कि अराजक तत्त्व मैतेई युवा संगठन, मैतेई लीपुन, कांगलेइपाक कनबा लुप, अरामबाई तेंगगोल, विश्वा मैतेई परिषद और अनुसूचित जनजाति मांग समिति से थे।

* इस घटना में गांव के पांच लोग  जंगल की ओर बचाने के लिए भाग रहे थे। इसमें 56 वर्षीय व्यक्ति, उसका 19 वर्षीय बेटा और 21 वर्षीय बेटी सहित दो और महिलाएं 42 वर्षीय और 52 वर्ष थी।

* जंगल के रास्ते में नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन की एक टीम ने उन्हें बचाया। नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन से 2KM दूर टूबू के पास हिंसक भीड़ ने उन्हें रास्ते में रोक लिया और पुलिस से अपने कब्जे में ले लिया।

* भीड़ ने 56 वर्षीय व्यक्ति को तुरंत मार डाला। तीनों महिलाओं को भीड़ के सामने निर्वस्त्र करने के लिए बाध्य किया गया। 21 साल की महिला के साथ बड़ी ही क्रूरता के साथ सामूहिक रेप किया गया,  महिला का छोटा भाई बहन को बचाने की कोशिश में भीड़ द्वारा उसकी हत्या कर दी गई। 

* अन्य दो महिलाएं स्थानीय लोगों की मदद से भाग निकलीं। वर्तमान में दोनों महिलाएं राहत शिविरों में हैं। वीडियो में सिर्फ दो महिलाएं दिखती हैं। लेकिन भीड़ ने 50 साल की एक और महिला को अपने कपड़े उतारने के लिए कहा

अन्य तथ्य

* मणिपुर पुलिस के अनुरोध के बाद गृह मंत्रालय अतिरिक्त CAPF को भेजा है। सेना के अधिकारियों का कहना है कि AFSPA के बिना मणिपुर में सेना को चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।

* इससे मणिपुर का कृषि क्षेत्र बुरी तरह प्रभावित हुआ क्योंकि राज्य में 1543.23 मीट्रिक टन चावल के नुकसान का अनुमान है मणिपुर हिंसा में विस्थापितों के लिए केंद्र ने 101 करोड़ रुपये का राहत पैकेज उपलब्ध कराया है।

* मणिपुर के चुराचंदपुर AXIS BANK बैंक शाखा से 1 करोड़ से अधिक की नकदी गायब हो गई है।

आशा करता हु की आप लोगों को समझ आ गया हो मणिपुर हिंसा में क्यों जल रहा है मणिपुर।

FAQ

1- मणिपुर हिंसा का मुख्य कारण ?

मणिपुर हिंसा में मैतेई और कुकी जनजाति के बीच आरक्षण मुख्य कारण है।

2- मणिपुर हिंसा में क्या-क्या हुआ ?

मणिपुर हिंसा में 142 लोगों की मौत, 5995 हिंसा के मामले दर्ज , 5000 आगजनी की घटनाये दर्ज , 6745 लोग हिरासत में, 60000+ लोग बेघर हुए।

3- मणिपुर हिंसा कब हुई ?
27-28 अप्रैल के आंदोलन ने 3 मई को हिंसा का रूप ले लिया और 4 मई को ये हिंसा मानवता की सीमा को लांघा गई।

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