ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

हाल ही मे Christopher Nolan ने Physicist J. Oppenheimer पर आधारित फिल्म “Oppenheimer” बनाई जो भगवत गीता के एक विवादित दृश्य के कारण सुर्खियों में है। इस पोस्ट में आपको पता चलेगा कि कैसे अमेरिका ताकतवर बना या यूं कहें कि कैसे अमेरिका ने दूसरे विश्व युद्ध को रोका, परमाणु बम कैसे बना, कब बना और क्यों बना और दूसरा विश्व युद्ध क्यों शुरू हुआ।

ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

प्रथम विश्व युद्ध का परिणाम

* प्रथम विश्व युद्ध 1914 से 1918 तक चला जिसमें मित्र राष्ट्र जीत गए और जर्मनी को घनघोर निराशा का सामना करना पड़ा। विजित राष्ट्र में शामिल देश में ब्रिटेन, फ्रांस, रूस प्रमुख थे। 1917 के बाद संयुक्त राज्य अमेरिका भी (मित्र देशों की ओर से) युद्ध में शामिल हो गया था। उन्होनें 28 June 1919 को वायसराय संधि को जर्मनी पर जबरदस्ती थोपा था। इसने दोनों देशों के बीच युद्ध की स्थिति को समाप्त कर दिया। इसके तहत जर्मनी को अपनी भूमि के एक बड़े हिस्से से हाथ धोना पड़ा, दूसरे राज्यों पर कब्जा करने की पाबन्दी लगा दी गयी, उनकी सेना का आकार सीमित कर दिया गया और जो भी नुकसान युद्ध में हुआ है उसका पूरा पैसा जर्मनी को चुकाना होगा। इस कारण एडोल्फ हिटलर और अन्य जर्मन लोग इसे अपमानजनक मानते थे और इस तरह से यह सन्धि द्वितीय विश्व युद्ध के कारणों में से एक थी।

प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी क्यों हारा?

* अपनी हार का कारण खोजने पर जर्मनी में रह रहे नाजियों को ये एहसास हुआ कि उनके हार के पीछे एक विशेष प्रकार की नस्ल या जाति जिम्मेदार है जिसका नाम था यहूदी(जूस)। यहूदियों को खत्म करने के लिए नाजियों में एक व्यक्ति निकला जिसका नाम था एडॉल्फ हिटलर। जिसे आज आप तानाशाही का पर्याय मानते हैं। हिटलर ने नजियों में एक उत्साह का संचार किया और कहा कि हमारे दुश्मन देश के बाहर नहीं हैं बल्कि भीतर हैं और इन यहूदियों को हमें खत्म करना होगा।

* यहूदी जो जर्मनी में तुलनात्मक रूप से बहुत बुद्धिमान थे और इसमे पढ़े लिखे लोग थे। ऐसे में उन्हें लगा कि अब हमारी जान को खतरा है इसलिए कई यहूदी तो माइग्रेट होकर अमेरिका जाकर बस गए और बड़े-बड़े वैज्ञानिक बने जैसे अल्बर्ट आइंस्टीन, नील बोहर। लगभग 50 लाख यहूदियों को हिटलर द्वारा बहुत बुरी तरह मार दिया गया। अगर हिटलर ऐसा न करता तो एटम बम जर्मनी में पहले बना होता। श्री कृष्णा ने भी भगवत गीता में कहा कि- इंसान की जाति उनके कर्म से होती है। यही बात हिटलर नहीं समझ सका।

ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

द्वितीय विश्व युद्ध में क्या हुआ?

* प्रथम विश्व युद्ध का बदला लेने के लिए 1939 में जब हिटलर जर्मनी को युद्ध के मुहाने पर ले जाकर खड़ा कर दिया और पोलैंड पर हमला कर दिया यहीं से शुरूवात होती है द्वितीय विश्व युद्ध की। इसमें जर्मनी का साथ दे रहे थे मुसोलिनी के नेतृत्व इटली और जापान। इस बात से चिंतित थे अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन, सोवियत संघ ने इन्हें बीच में रोकने का प्रयास किया। प्रयास करने में जब जांचा गया तो पता चला की जर्मनी ने अपने इस 20 साल के दौर में प्रथम विश्व युद्ध का बदला लेने के लिए विज्ञान और तकनीक में बहुत शोध कर चुका था।

* आज आप जब रूस-यूक्रेन युद्ध देखते हैं तो आए दिन किसी ना किसी हथियार की खबर सुनने को मिलती है और इस 1.5 साल से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में जहां एक और पश्चिमी देश यूक्रेन को भर-भर के हथियार दे रहे हैं वही दूसरी और रूस अकेले इतने सारे हथियारों का अकेले मुकाबला कर रहा है तो जरा विचार करें कि रूस के पास कितने हथियार रहेंगे होंगे। आज जैसा रूस के हथियार आपको सोचने पर मजबूर करते हैं विचार कीजिए कि हिटलर के पास कितने हथियार रहे होंगे कि उसने दुनिया को एक साथ नापने की सोची और इसमें उसका साथ दे रहे थे इटली और जापान।

* मित्रपक्ष शक्तियाँ (Allied powers) उन देशों का गुट था जिन्होनें द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और चीन का साथ दिया और अक्ष शक्तियों (Axis Powers) के ख़िलाफ़ लड़े। बाकी मित्रपक्ष देश द्वितीय विश्व युद्ध में या तो इसलिए शामिल हुए क्योंकि उन पर अक्ष देशों ने आक्रमण कर दिया, या उन्हें अपने ऊपर आक्रमण होने का डर था, या फिर उन्हें चिंता थी कि अक्ष शक्तियाँ अगर जीत गयी तो पूरी दुनिया पर हावी हो जाएँगी।

* 1 सितम्बर 1939 में युद्ध की शुरआत में फ्रांस, पोलैंड और यूनाइटेड किंगडम (ब्रिटेन) ही मित्रपक्ष में थे। जल्द ही ब्रिटेन के कुछ अधीन देश – ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, न्यू जीलैंड और दक्षिण अफ्रीका भी इस गुट में सम्मिलित हो गए। 1941 के बाद मित्रपक्ष का नेतृत्व ब्रिटेन, अमेरिका और सोवियत संघ ने मिलकर किया। भारत (जो ब्रिटिश राज के अधीन था), बेल्जियम, यूनान, मेक्सिको, चेकोस्लोवाकिया, नॉर्वे, नेदरलैंड्ज़, इथियोपिया और ब्राज़ील में मित्रपक्ष में थे। 1945 में जाकर मित्रपक्ष शक्तियों की जीत होने पर अक्ष शक्तियों का गुट ख़त्म हो गया ।

क्या हिटलर परमाणु बम बना लेता?

* हिटलर के बारे में एक कथन प्रचलित था कि हिटलर न्यूक्लियर बम बना चुका है जो कि मात्र चर्चा में ही उस समय मानव सभ्यता के लिए विनाशकारी था क्योंकि किसी ने पहले न्यूक्लियर बम का नाम नहीं सुना था केवल चर्चाएं हो रही थी जैसे आज-कल आप हाइपरसोनिक मिसाइलों की चर्चाएं सुनते हैं।आज लोगों को एहसास नहीं लेकिन हिटलर दुनिया जीतने से बस बाल बराबर दूर था – डॉo एडवर्ट टेलर (Manhattan Project)

न्यूक्लियर बम उस समय ही क्यों बना?

उस समय तीन चीजें खोजी जा चुकी थी जो न्यूक्लियर बम निर्माण को प्रोत्साहित करती थी जो निम्न है-

* E = mc2

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विज्ञान के प्रतिष्ठित वैज्ञानिकों में शुमार जर्मनी के वैज्ञानिक अल्बर्ट आइंस्टीन की समीकरण E = mcयानी द्रव्यमान और ऊर्जा को आपस में बदला जा सकता है। इसी समीकरण में यूरेनियम के एटम को एनर्जी में बदलने की लोगों में महत्वाकांक्षा पनपती है। लोगों को यह बड़ी आसानी से समझ में आने लगता है कि कितना Atomic Mass यूज करने से कितनी एनर्जी निकलती है।

* यूरेनियम का तीन अवयवों में विभाजन

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1938 में जर्मनी के तीन वैज्ञानिक जिन्होंने यूरेनियम को तीन छोटे-छोटे अवयवों में तोड़ दिया था इससे सभी को डर हुआ कि second World War की आड़ में जर्मनी कहीं न्यूक्लियर बम न बना ले।

* Chain Reaction की खोज

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एनरिको फर्मी द्वारा 1942 में अमेरिका के शिकागो शहर में अंडरग्राउंड बने एक रिसर्च के तहखाने में खबर हुई कि केमिकल रिएक्शन को चैन रिएक्शन में बदला जा सकता है यानी 1 एटम को 2 एटम में, 2 को 4 में, 4 को 8 में इस प्रकार बढ़ते चले जाते हैं जो (Atmosphere)वातावरण में बहुत ज्यादा एनर्जी रिलीज करते हैं जिसे रोकने का तरीका वैज्ञानिकों को भी नहीं मालूम था। Enrico Fermi द्वारा 2 Dec 1942 को दुनिया की फर्स्ट कंट्रोल चैन रिएक्शन खोजी जा चुकी थी।

द्वितीय विश्व युद्ध के समय ही सर्वाधिक वैज्ञानिक खोजें क्यों?

* द्वितीय विश्व युद्ध एक ऐसा दौर था जिसने दुनिया को बहुत सारी खोजे दी चाहे वह न्यूक्लियर बम हो चाहे पनडुब्बी या तमाम रिएक्शन जिनकी आज हम चर्चा करते हैं। उस दौर में दुनिया में यह होड़ मची थी कि जिसके पास तकनीकी ताकत होगी दुनिया पर उसका राज होगा परमाणु बम उसी का नतीजा था।

* वैज्ञानिकों को डर था यदि न्यूक्लियर बम बन गया तो दुनिया को खत्म करने की ताकत जर्मनी के पास आ जाएगी जिसमें जर्मनी के एक वैज्ञानिक Leo Szilard न्यूक्लियर बम के डर को भाप चुके थे इसलिए वे अमेरिका गए। उस समय अमेरिका अमीर देश था अपनी बात को कहने के लिए उन्होंने अल्बर्ट आइंस्टीन द्वारा अमेरिकी सरकार(Roosevelt) को इस बात से आगाह किया कि जर्मनी न्यूक्लियर बम बना रहा है इसलिए जरूरी है कि अमेरिका पहले ही न्यूक्लियर बम बना ले ताकि शक्ति संतुलन हो सके क्योंकि शस्त्र शांति लाते हैं। शायद यही कारण है कि भारत न्यूक्लियर बम रखता है। एक कहावत है कि-

“क्षमा शोभती उस भुजंग को जिसके पास गरल हो, उसको क्या जो दंतहीन विषहीन सरल हो”

अर्थात आपको क्षमा तभी शोभा देती है जब आपके पास ताकत हो।”

Manhattan Project : परमाणु बम बनाना

* अमेरिका द्वारा परमाणु बम बनाने का एक टॉप सीक्रेट प्रस्ताव रखा गया जिसका नाम था Manhattan Project हालांकि यह गुप्त था इसका प्रसारित नाम Manhattan Engineer District Project था जिसमें न्यू मेक्सिको राज्य के लॉस एलामोस शहर से 330 किलोमीटर दूर रेगिस्तान में एक जगह को चुना गया जिसका स्पैनिश भाषा में नाम था, “ज़ोर्नाडा, डेल, मुएर्तो” या हिंदी में कहें तो ‘मौत का सफ़र’ जिसमें एक नया शहर विकसित किया गया और इसी नवनिर्मित शहर में न्यूक्लियर बम गुप्त रूप से बनाया गया। इस प्रोजेक्ट में अमेरिका ने अपने यहां अनेक वैज्ञानिक को आमंत्रित किया इसको लीड करने के लिए आर्मी के एक जनरल Leslie Groves को बुलाया गया जिन्होंने इस Manhattan project के लीडर के तौर पर Physicist J. Oppenheimer को चुना।

* इसमें 1.5 लाख लोग 1942 से 1945 तक 3 साल लगे रहे जिसमें लगभग 2.2 बिलियन डॉलर का खर्च आया था। इन सालों में कई मुश्किलें आई और काम पूरी गोपनीयता से होना था। प्रोजेक्ट सफल होगा या नहीं, इसकी कोई गारंटी नहीं थी और इसी दौरान अमेरिकी वैज्ञानिकों को जर्मनी से होड़ बनाए रखनी थी जो पहले सफल होता, दुनिया उसकी मुट्ठी में होती दुनिया भर के महान वैज्ञानिकों ने मैनहैटन प्रोजेक्ट में अपना योगदान दिया इनमें ओपेनहाइमर, लियो ज़िलार्ड, एनरिको फ़र्मी का नाम आपने सुना होगा इनके अलावा नील बोह्र, रिचर्ड फ़ायनमेन, क्लाउस फुक्स जैसे दिग्गज वैज्ञानिकों के नाम शामिल थे।

दुनिया का पहला न्यूक्लियर बम परीक्षण

ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

* 12 जुलाई 1945 को बम का प्लूटोनियम कोर साइट पर लाया गया और 15 जुलाई को बम को पूरी तरह असंभल कर दिया गया और 100 फुट ऊंचे टावर पर रखा गया और टेस्ट का समय 16 जुलाई 1945 को सुबह 4:00 बजे रखा गया लेकिन बारिश के चलते इसे 5:30 बजे किया गया। बम फटते ही आसमान में उजाला छा गया, 5 फुटबॉल खेल के मैदान के बराबर आग का गोला बन गया, गर्मी बढ़ गई धरती पर कम्पन हुई 15000 से 20000 TNT ऊर्जा प्रसारित हुई और मीलो तक इसका असर महसूस किया गया। यह दुनिया का पहला न्यूक्लियर बम परीक्षण था जिसे ट्रिनिटी टेस्ट के नाम से भी जाना जाता है जहाँ ट्रिनिटी परमाणु बम के परीक्षण का कोड नेम था। अमेरिका इस माध्यम से न्यूक्लियर बम बनाने में सफल हुआ।

जापान पर दुनिया का पहला न्यूक्लियर हमला

जहां चर्चा थी कि हिटलर न्यूक्लियर बम बना रहा है वहीं अमेरिका अपने दो न्यूक्लियर बम लेकर जापान पर गिराता है

ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

1- हिरोशिमा(Hiroshima)

यह बम 6 Aug 1945 को सुबह 8:15 बजे हिरोशिमा पर गिराया गया था, इस बम का नाम Little Boy था, यह लगभग 60Kg यूरेनियम से भरा हुआ था और 10 फीट लंबा था। विपरीत हवा के कारण, यह निर्धारित लक्ष्य शीओल ब्रिज से लगभग 800 फीट दूरी पर शिमा सर्जिकल क्लिनिक के ऊपर फट गया। परिणामस्वरूप, लगभग 1.6 Km का क्षेत्रफल पूरी तरह से नष्ट हो गया, 11 वर्ग किमी का इलाका आग की चपेट में आकर जल गया। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक इस बम से 12 वर्ग किलोमीटर का इलाका पूरी तरह तबाह हो गया। जापानी अधिकारियों ने दावा किया कि हिरोशिमा शहर की 69% इमारतें पूरी तरह से नष्ट हो गईं और 6.7% इमारतें आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो गईं। परमाणु बमबारी से बने बादलों के कारण सुबह 11 बजे के आसपास हिरोशिमा में भारी बारिश हुई। इस बम से 140000 लोग मारे गए।

2 – नागासाकी(Nagasaki)

दूसरा बम 9 Aug 1945 को दक्षिण जापान के बंदरगाह शहर नागासाकी पर सुबह 11:1 बजे गिराया गया। इस बम का नाम Fat Man था। इसका वजन 4500Kg और लंबाई 11.5 फीट थी, बम में 6.4Kg प्लूटोनियम था, जो कि बहुत खतरनाक था। 43 second के बाद बम जमीन से 1,560 फीट की ऊंचाई पर फट गया। इससे 3,900° C की गर्मी उत्पन्न हुई और हवा की गति 1005Km/h तक पहुंच गई। इससे तत्काल होने वाली मौतों की संख्या 40000 और 75,000 होने का अनुमान लगाया गया था और 1945 तक यह आँकड़ा 80000 तक पहुँच गया इससे जापान युद्ध से पीछे हट गया और हिटलर सदमे में चला गया। इस प्रकार अमेरिका ने द्वितीय विश्व युद्ध को रोका था।

शीत युद्ध(Cold War) का अर्थ क्या है?

* जर्मनी के पतन के साथ अमेरिका-रूस के बीच शीत युद्ध का संघर्ष शुरू होता है इसमे दुनिया दो ध्रुवों के बीच बंट गई और ये दो ध्रुव थे अमरीका और सोवियत संघ। इसमें दोनों महाशक्तियों ने अपना सर्वस्व कायम रखने के लिए विश्व के अधिकांश हिस्सों में परोक्ष युद्ध लड़े।  द्वितीय विश्व युद्ध खत्म होने के बाद 1945 से 1989 के बीच शीत युद्ध का दौर शुरु होता है।

ओपेनहाइमर : परमाणु बम का जनक

ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

* ओपेनहाइमर को मैनहैटन प्रोजेक्ट के तहत प्रोजेक्ट Y का डायरेक्टर बनाया गयाप्रोजेक्ट Y, इस पूरे मिशन का साइंटिफिक आर्म था जिसके तहत बम को डिज़ाइन किया जाना था ओपेनहाइमर एक जिनियस इंसान थे, लेकिन कॉलेज के दिनों में प्रैक्टिकल से डरते थेकॉलेज में एक बार उन्होंने अपने प्रोफ़ेसर को ज़हर देने की कोशिश की थी एक प्रेमिका थी, जिसने उन्हें कम्युनिस्ट विचारों से रूबरू कराया ओपेनहाइमर भगवत गीता पढ़ते थे, साहित्य में रुचि थी लेकिन लोगों के साथ व्यवहार में अक्खड़ थे इसके बावजूद जब उन्हें मैनहैटन प्रोजेक्ट की ज़िम्मेदारी मिली, उन्होंने बाक़ी सभी चीज़ों को किनारे रखते हुए अपना पूरा ध्यान प्रोजेक्ट पर लगा दिया

* ओपेनहाइमर वे व्यक्ति हैं जो इतनी सारी मौत का जिम्मेदार था वह कहता था कि मुझे न्यूक्लियर बम बनाने में भगवत गीता के एक श्लोक से मोटिवेशन मिलता था। श्रीमद् भागवत का श्लोक था –

ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

कालोऽस्मि लोकक्षयकृत्प्रवृद्धो
लोकान्समाहर्तुमिह प्रवृत्त: |
ऋतेऽपि त्वां न भविष्यन्ति सर्वे
येऽवस्थिता: प्रत्यनीकेषु योधा: ||

* नागासाकी पर हमले के बाद ओपनहाइमर जाकर राष्ट्रपति हेनरी ट्रुमैन से मिले और उनसे आग्रह किया कि परमाणु हथियारों को आगे युद्ध के इस्तेमाल में न लाया जाए ओपनहाइमर ने ट्रूमैन से कहा, “मिस्टर प्रेसिडेंट, मुझे महसूस होता है, मेरे हाथ खून से रंगे हुए हैं” ट्रूमैन ने जवाब दिया, “बम मेरे आदेश से गिराया गया, इसकी ज़िम्मेदारी मुझे लेने दो”

* ओपनहाइमर न्यूक्लियर प्रोग्राम से अलग हो गए और बाद में उन्होंने हाइड्रोजन बम बनाने की होड़ में भाग नहीं लिया इस पर उन्होंने कहा कि “विज्ञान हमें एक चीज सिखाता है कि एक बार की गई गलती को बार-बार न करें। इसका नतीजा हुआ कि सरकार ने उनके ख़िलाफ़ फ़ाइल खोल दी, कम्युनिस्ट पार्टी से उनके पुराने रिश्तों का हवाला देकर उनका सीक्रेट क्लीयरेंस छीन लिया गया

* ओपेनहाइमर ने भारतीय राजदूत विजया लक्ष्मी के द्वारा प्रधानमंत्री नेहरू से गुप्त रूप से कहलाया की भारत में थोरियम अधिकांश मात्रा में पाया जाता है, स्पष्ट है कि अमेरिका या ब्रिटेन द्वारा भारत से थोरियम मंगाएंगे अतः आपसे निवेदन है की आप थोरियम देने से मना केर दीजियेगा क्योकि अमेरिका इससे बड़े स्तर पर परमाणु बम बनाएगा।ओपेनहाइमर(Oppenheimer):परमाणु बम कब क्यों और कैसे बना?

* भौतिक विज्ञानी होमी भाभा के अनुरोध पर नेहरू ने रॉबर्ट ओपेनहाइमर को 1954 में भारतीय नागरिकता की पेशकश की थी। ओपेनहाइमर की मृत्यु 62 साल कि आयु मे गले के कैंसर से हुई थी।

भारत में थोरियम कहाँ पाया जाता है

* केरल की मिट्टी अम्लीय है, जिसमें उच्च फॉस्फेट क्षमता और कम जल धारण क्षमता है, और भारत में मोनाजाइट का सबसे बड़ा भंडार है। मोनाजाइट में थोरियम की मात्रा अधिक होती है। मोनाज़ाइट में 2.5% थोरियम होता है और यह अधिकांश चट्टानों और मिट्टी में पाया जाता है।

FAQ

1- थोरियम का सबसे बड़ा भंडार कहाँ पाया जाता है?

भारत के केरल राज्य में दुनिया का सबसे बड़ा थोरियम भंडार(80%) पाया जाता है।

2- ओपेनहाइमर क्यों प्रसिद्ध है?

जूलियस रॉबर्ट ओपेनहाइमर (22 अप्रैल, 1904 – 18 फरवरी, 1967) एक अमेरिकी सैद्धांतिक भौतिक विज्ञानी और द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान मैनहट्टन प्रोजेक्ट के लॉस एलामोस प्रयोगशाला के निदेशक थे। उन्हें “father of the atomic bomb” कहा जाता है।

3- भारत के पहले परमाणु परीक्षण को “स्माइलिंग बुद्धा” क्यों कहा गया?

1974 में 18 मई को भारत भी बुद्ध पूर्णिमा मना रहा था, जिसके कारण उसके पहले परमाणु परीक्षण का नाम “स्माइलिंग बुद्धा(मुस्कुराते हुए बुद्ध)” रखा गया।

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